Wednesday, July 8, 2009

आओ इश्क के खवाब पर चले

अब सपने है..... सपनो का क्या।
धरम भा जी को भी तो ड्रीम गर्ल मिल गयी। गलती से एक ड्रीम गर्ल मेरी भी सपने में आ गयी। नादान हु ना। पहली पहली बार हरदय धड़का।
इससे पहले की नॉर्मली इजहार होता, कवी महोदय आ पहुचे अपनी टांग अडाने। उनका तर्क भी सॉलिड था। बोले पुराने स्टाइल में कोई कविता सुनाओ, फिर देखो कमाल। मेरी ओके बोलते ही हो गए जनाब शुरू।
(सॉरी बिग बॉस. सहना सीखो मेरे साथ)
मैं था शिथिल पत्थर।
थम चुकी थी सांसे, जम चुका था लहू भी मेरा।
क्यों मूरत अपनी दिखाई।
क्यों फिर लौट कर आ गए
फिर क्यों मुझमे प्राण लौटा गए।
..............................
आँखें मेरी थी गयी पथरा, जग को भुला बैठा।
क्यों फिर अपनी आँखों की माया दिखलाई.
मेरी आँखें अब तक तकती हैं तेरी राहे.
क्यों मुझमे प्राण लौटा गए
.......................................

चुपचाप सोया था मैं नींद में
क्यों खोल दिया सपनो का द्वार
खवाब भी तो अपने ना रहे
फिर क्यों मुझमे प्राण लौटा गए।

...............................
तेरी भोली मुस्कान, भोली हया में जाने कैसा है जादू
खेलता बचपन, बारिश से भीगता मन
पवित्र मेरा प्रेम, लगे मुझे हर जगह आप आये
क्यों मुझमे प्राण लौटा गए

....................
मैंने कवी का पर्चा उठाया और चलने ही लगा था ड्रीम गर्ल के पास। इतने में एक स्मार्ट लड़का प्रकट हुआ और बोला.. नालायक ये पर्चा सुनाया तो वो तेरे प्राण ले ही लेगी........
टाइम हैस बीन चेंज्ड बॉस.....मेरा आईडिया मान और देख मैजिक.........मैं नए ज़माने का कवी हूँ...देखना मेरे रिवोल्वर गोली वर्ड का कमाल
मैंने कहा चलो आप ही सुनाओ...शायद कुछ बात बने।
I have never never seen an angel
क्या आप बतायेंगी वो रास्ता
आई हो जहा से
really if it`s not a dream
defenetly you would come from the stars
.................

I`m thankful them, who send you on earth
देखो आसमा खाली खाली
और रोशन हुई ये धरती
आओ मिलकर रंग भरे
दोस्ती की एक नयी शुरुआत करे

...................
काके जल्दी उठ ते पापा नु छड आ......फिर आके बहन नु वि कॉलेज ले जाना ही..........समझे कुछ........अगर इन कवियों के चक्कर में पडोगे तो सोते ही रहोगे..........

1 comment:

Nagarjuna said...

waah.....tu likhta kyon nahi?Likha kar...shabdon par pakad hai...bahut achcha laga.Mujhe to aaj pata chala ki tu likhta hai...kabhi bataya bhi nahi...dusht.