Sunday, July 4, 2010

...जान बचाओ प्यारो

चंटू को नया-नया इश्क हुआ। पर हाय री किस्मत! ये बुखार चढ़ा भी तो चौधरियों के ही अड्डे में। चौधरी तो चौधरी होते हैं भाई। कानून उनके लट्ठ के आगे पानी भरता है। फिर चंटू जैसों की हरियाणा में क्या बिसात। अगूंठा टेक चंटू ने ढाई आखर तो पढ़ लिए पर, प्रेम के बुखार का ताप छुपाने की तकनीक नहीं सीख पाया था। वैसे भी इश्क और मुश्क कहां छिपते हैं। एक दिन निकला था भैंसों को नहलाने दूसरे गांव में। भैंस पर बैठे-बैठे ही गांव की छोरी से चंटू की आंखें सात-आठ हो गईं। उधर भैंसे नहाने में मग्न हुई तो इधर चंटू मियां पीपल के पेड़ के नीचे इश्क के जोहड़ में गोते लगाने लग गए। पीपल के पेड़ पर तो वैसे भी भूतों का वास होता है। उसे क्या मालूम था कि पहेली फिल्म में शाहरुख खान तक भूत बनकर लटके थे। हालांकि पीपल के पेड़ पर भूत लटके थे या नहीं यह तो पता नहीं, लेकिन पेड़ के पीछे तो गांव के दो चौधरी पत्ते खेल रहे थे। चंटू के इश्क की फाइल गांव की गली से लेकर पंचायत तक पहुंच गई। 'भाईचारे के गांव में नैन लड़ाए और वो भी हमारे होते हुए। इश्क ही लड़ाना था तो किसी दूसरी स्टेट से छोरी खरीद लेता। माना कि इब छोरियों की कमी हो रही है। पर इसका मतबल ये नहीं चौधरियों की मूंछ काटने पर उतारू हो जाओ। दो दिन पहले ही दो को फांसी पर लटकाया था। क्या, भूल गया है चंटू। सूबा, डूंगा, फत्ता और दूसरे भाई आज तक कंवारे बैठे हैं। पर किसी की हिम्मत नहीं इश्क नाम की चिड़ी को दाना भी डाल दें। पंचायत को अपनी इज्जत बचानी होगी और एक बार फिर एक जोड़े का बोझ कम करना होगा'। पंचायत के चौधरी रुष्ट हो चुके थे। इसी बीच लट्ठ उठाए एक पंच ने मीडिया के टांग अड़ाने की बात कहते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी। 'अखबार वाले तो नालायक होते हैं। इनकी चिंता करने की जरूरत नहीं है। सुबह जो छापते हैं शाम को उसी पर जलेबी बिकती है। खाकी वर्दी वाले तो म्हारे ही छोरे हैं और लीडर को पंचायत ही चुनती है। तो फिक्र नॉट और अपने मुस्टंडों को चंटू की फाइल सौंप दो। जिस भी जोहड़, पीपल के पेड़ या फिर किसी धर्मशाला में दिखाई दे, उसे पकड़कर हाजिर करो। उसकी पारो को भी साथ लेकर आना। नैन बेशक चंटू ने लड़ाए है पर इसमें कसूर उसके बाबू और मां का भी कम नहीं है। ऐसा बेअकल छोरा पैदा कर दिया और गांव की इज्जत पर कलंक लगा दिया। चंटू को तो यमपुरी भेजना ही है पर इसके बाबू और मां को भी गांव निकाला दे दो। आज के बाद कोई बाबू और मां भी छोरा-छोरी पैदा करन से पहले सोच लेंगे कि बच्चों को कुछ भी बनाएंगे पर प्यार मोहब्बत के पाठ से दूर ही रखेंगे'। चौधरियों ने फैसला सुना दिया। ...और इसके बाद चंटू और उसकी पारो का तो कुछ अता पता नहीं चला पर फैसला सुनाने वाला चौधरी देश की सबसे बड़ी पंचायत में जरूर पहुंच गया है। यहां अब वो हिंदू मैरिज एक्ट को ही बदलने के लिए लट्ठ गाड़ रहा है। ...तो नैनों के आसपास अब घोड़े की तरह पट्टियां लगा लें। कहीं ऐसा न हो कि अंखियां लड़ जाएं बीच बजार और झेलना पड़ जाए लाठियों का प्रहार और खुल जाएं स्वर्ग के द्वार। चंटू भी वहां पहुंच चुका है और संदेश दे रहा है, ये इश्क नहीं आसां पारो, चौधरियों से जान बचाओ प्यारो।

3 comments:

Udan Tashtari said...

ये कैसा फैसला...

सूफ़ी आशीष/ ਸੂਫ਼ੀ ਆਸ਼ੀਸ਼ said...

बेचारा चंदू!
हा हा हा.....
आँखें "सात-आठ" का प्रयोग बेहद भाया!
जय हो!
www.myexperimentswithloveandlife.blogspot.com

हरकीरत ' हीर' said...

धर भैंसे नहाने में मग्न हुई तो इधर चंटू मियां पीपल के पेड़ के नीचे इश्क के जोहड़ में गोते लगाने लग गए। पीपल के पेड़ पर तो वैसे भी भूतों का वास होता है। उसे क्या मालूम था कि पहेली फिल्म में शाहरुख खान तक भूत बनकर लटके थे....

बहुत खूब ......!!

ये हास्य व्यंग की शैली में लिखना हर किसी के बस का नहीं ......!!